Wednesday, February 20, 2019

मुक्ति के स्वर अंक 21, मार्च 2019

इस अंक में... 
  • सम्पादकीय : क्यों मनाते हैं महिला दिवस ?

  • पाठकों के पत्र
  • श्रद्धांजलि

              फहमीदा रियाज तुझे सलाम
             कृष्णा सोबती : निर्भीक आवाज का गुजरना
  • कामकाजी मध्यमवर्गीय महिलाएँ और बच्चों की परवरिश
  • घरेलू काम करने वाली महिलाओं का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान
  • केरल डायरी के पन्ने से
  • पुस्तक परिचय: ‘एक बहुत लम्बा खत’
  • धर्म, लिंगभेद और समानता : (सबरीमाला के सन्दर्भ में)
  • महिला संघर्ष की मुखर आवाज ‘मी टू’ अभियान
  • कविता

      इनके बारे में सोचिए
      मेरे घर में एक आरामदेह बिस्तर है

  • महिला संरक्षण गृहों की हकीकत
  • दंगों में महिलाओं की स्थिति
  • धर्म के नाम पर महिलाओं का उत्पीड़न
  • भारतीय समाज में नारी
  • सगे–सम्बन्धियों के बीच असुरिक्षत महिलाएँ
  • महिला पत्रकारों की बढ़ती ‘ट्रोलिंग’
  • घटता लिंग अनुपात
  • क्यों करती हैं महिलाएँ आत्महत्या ?
  • महिलाओं के अधिकार

  • पाठक की कलम से

     आजादी की पहली उड़ान
     नयी जिन्दगी

  • नेमप्लेट
  • लैंगिक न्याय पर एनडीए की सोच


No comments:

Post a Comment